
आजादी बाद भी नही बदली गांव की तस्वीर
सरकार की सुशासन नीती पर चेरकंटी गाँव की बदहाली बना अभिशॉप अधिकारी नहीं ले रहे सुध ?
NEWS BY-भरत विहान दुर्गम
बीजापुर6/5/25
बीजापुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर पानी की बूंद बूंद के लिए तरसते है लोग.जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी नही दे रहे इस और ध्यान ।
कई सरकार बदली लेकिन नई बदली गांव की बदहाल तस्वीर.
बीजापुर से पोंजेर होते हुए भोगमगुड़ा पहुँचते है वँहा से बेरुदी नदी को पारकर चेरकंटी के मोडियम पारा पहुँचते है जंहा 70 से लगभग 80 लोग निवासरत है।जो दशकों से पानी की बड़ी जद्दोजहद से जूझ रहे है लोग।बेरुदी नदी एक मात्र ऐसी नदी पड़ती है।जिसमे बैलाडीला का लोहा अयस्क पानी विलय होकर बेरुदी नदी में आती है।इसी पानी को पीने को मजबूर रहते है ग्रामीण।
छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन की त्योहार की खुली पोल..
क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लेंगे इस गांव की बदहाली की संज्ञान ?दशकों से गांव तक पहुँचने के लिए जान जोखिम डालकर गांव के लोग बारिश में नदी पार करते है।उसकी भी तत्कालिक तौर पर बनाई जा सकती है व्यवस्था तो क्यों नही कि जाति है बोट की व्यवस्था ?
कहाँ गये नेताओं के बड़े बड़े वादे जमीनी हकीकत देखें तो कुछ और ही बयाँ करती नजर आती है। लाल पानी, काला पानी, पिकर जीवन जीने को मजबूर गाँव के बोले भाले नौनिहाल बच्चे आखिरकार इन ग्रामिणों के लिए कब खुलेगा विकास का दरवाजा । बैलाडिला से लोह युक्त लाल पानी लेकर आने वाली ये बेरुदी नदी में कब तक गाँव वाले गँवायेंगे अपनी जान । कब पहुंचेगाँ स्वास्थ अमला ।
कब तक नदी का गंदा मटमैला पानी पीकर लोग होंगे डायरिया मलेरिया के शिकार ।
उन महिलाओं की इज्जत आबरू की बात करने वाले लोग कहाँ गए ?
कहाँ गई योजनाएँ जो व्यक्तिगत शौचालय की बात किया करते थे कब तक ग्रामीण स्तर पर खुले में शौच जाने को मजबूर होंगे लोग ।कब तक नदी मेंखुले में नहाने को मजबूर होंगे गांव के लोग ”
पूछता है आजाद भारत ? / 76 साल बाद भी विकास जमीन स्तर पर धरा का धरा रह जाता है
बारिश में नदी की मार गर्मी में बूंद बूंद जल की मार क्या यह लोग केवल नेताओं को वोट देने के लिए बने हैं ।

जिम्मेदार अधिकारी कब लेंगे शुद्
चेरकंटी गांव का पूछता है बच्चा बच्चा ।










