पुलिस की जांच पर उठे सवाल,परिजनों ने जताई हत्या की आशंका; न्यायिक जांच की मांग

बीजापुर: पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादी की मौत पर उठे सवाल, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका; न्यायिक जांच की मांग

NEWS BY:-BHRAT VIHAAN DURGAM

परिजनों ने पुलिस की प्रारंभिक जांच पर उठाए सवाल, प्रेस वार्ता में भी मामले को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग

बीजापुर। जिले में 21 अक्टूबर को पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादी नर्सुराम BODDU की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर प्रारंभिक जांच में मौत को आत्महत्या की आशंका से जुड़ा मामला बताया है। वहीं, मृतक के परिजनों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मौत को संदिग्ध बताया और मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के अनुसार, कमकानार निवासी नर्सुराम बोड्डू आत्मसमर्पण केबाद घर मे अपनी जिंदगी जी रहा था।उसके बाद बीजापुर पुनर्वास योजना के तहत सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ के लिए बीजापुर से फ़ोन आया था तो बीजापुर पहुँच पुर्नवास में राजमिस्त्री का कार्य सीख रहा था। वह राजमिस्त्री का काम सीखकर अपने जीवनयापन की दिशा में आगे बढने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान पुनर्वास केंद्र में उसकी अचानक मौत हो गई। घटना के बाद से ही परिजन कई सवाल उठा रहे हैं।

परिजनों ने उठाए कई सवाल

मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा आत्महत्या की बात कही जा रही है, लेकिन घटना को लेकर कई संदेह हैं। उनका कहना है कि जब परिवार को बीजापुर बुलाया गया, तब उन्हें अपने भाई का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ क्यों नहीं दिखाया गया? जिस स्थान पर मौत हुई, वहां भी परिजनों को जाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?

मृतक के भाई ने सवाल उठाया कि कड़ी सुरक्षा वाले पुनर्वास केंद्र में कोई व्यक्ति फांसी कैसे लगा सकता है? उन्होंने बताया कि घटना से एक रात पहले उनकी अपने भाई से फोन पर बातचीत हुई थी। उस दौरान वह सामान्य और हंसमुख तरीके से बात कर रहा था तथा उसने किसी तरह की परेशानी का जिक्र नहीं किया था।

मृतक बोड्डू आत्मसपर्ण नक्सली

परिजनों ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि उन्हें उचित जानकारी दिए बिना और उनकी मौजूदगी के बगैर पोस्टमार्टम कराया गया। भाई के मुताबिक, बीजापुर थाने के प्रभारी ने शव घर ले जाने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बाद में भेजने की बात कही थी। इन परिस्थितियों के चलते परिवार ने मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रेस वार्ता में भी उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भेला भाटिया ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले पुनर्वास केंद्र में किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो इसे सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामले में सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित माओवादी अपने घर में रहकर जीवनयापन कर रहा था और उसे सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से राजमिस्त्री का काम सिखाया जा रहा था। ऐसे में पुनर्वास केंद्र में उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और परिजनों को घटनास्थल तक जाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।

भेला भाटिया ने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ मिलकर एफआईआर दर्ज कराने और मामले की न्यायिक जांच की मांग की जाएगी, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

पुलिस ने कहा- विधिवत जांच जारी

इस मामले में बीजापुर के डीएसपी अभिषेक केसरी ने बताया कि 21 अक्टूबर को हुई मौत के संबंध में विधिवत मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। पुलिस और वैज्ञानिक अधिकारी घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं, ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके।

डीएसपी ने बताया कि पुनर्वास केंद्र प्रशासन के अंतर्गत आता है। नर्सुराम बोड्डू को पुनर्वास के तहत 25 हजार रुपये की राशि दी गई थी और अन्य निर्धारित सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी थीं।

परिजनों द्वारा शव पंचनामा की कार्रवाई के दौरान उनकी अनुपस्थिति को लेकर लगाए गए आरोपों पर डीएसपी ने कहा कि मृतक की बुआ नर्सो बोड्डू, गांव के चाचा और दो अन्य रिश्तेदार मौके पर मौजूद थे।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी मौत की वजह

नर्सुराम बोड्डू की मौत को लेकर एक ओर पुलिस प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और उससे जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करना महत्वपूर्ण होगा।


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