news by:- भरत विहान दुर्गम

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में एंटी-स्नेयर एवं टाइगर मॉनिटरिंग पर एक दिवसीय कार्यशाला


वन्यजीव संरक्षण, अवैध फंदों (स्नेयर) की रोकथाम तथा बाघों की वैज्ञानिक एवं प्रभावी निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर में “एंटी-स्नेयर एवं टाइगर मॉनिटरिंग कार्यशाला” का एक दिवसीय आयोजन किया गया।

 

कार्यशाला का आयोजन  उत्तम कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व तथा  सुमेध संजय सुरवाडे, उप निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के पर्यवेक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया।
फंदा मुक्त इंद्रावती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य इंद्रावती टाइगर रिजर्व को स्नेयर मुक्त बनाने की दिशा में एंटी-स्नेयर वॉक को अधिक प्रभावी एवं वैज्ञानिक बनाना, वन क्षेत्रों में अवैध फंदों की पहचान एवं निगरानी करना तथा मैदानी अमले की वन्यजीव मॉनिटरिंग क्षमता को मजबूत करना था।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एंटी-स्नेयर वॉक की वैज्ञानिक प्रक्रिया, सर्च तकनीक, संभावित स्नेयर क्षेत्रों की पहचान, फंदों के संकेतों की पहचान, वन क्षेत्र में आवश्यक सावधानियां तथा मैदानी स्तर पर डेटा संकलन एवं दस्तावेजीकरण के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई।
बाघ मॉनिटरिंग पर विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला में बाघों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न टाइगर ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बाघ की पारिस्थितिकी (Tiger Ecology), बाघ एवं अन्य वन्यजीवों के Indirect Signs की पहचान, पगमार्क एवं अन्य साक्ष्यों का दस्तावेजीकरण, ट्रेल वॉक की वैज्ञानिक पद्धति तथा फील्ड डेटा कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया।
प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि मैदानी निगरानी के दौरान प्राप्त पगमार्क, स्कैट, स्क्रैच, किल साइट, कैमरा ट्रैप एवं अन्य वन्यजीव संकेतों को किस प्रकार व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाए, ताकि इन आंकड़ों का उपयोग दीर्घकालीन वन्यजीव मॉनिटरिंग, बाघ संरक्षण तथा प्रबंधन योजनाओं में किया जा सके।
Nova Nature Welfare Society ने दिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण Nova Nature Welfare Society की टीम द्वारा प्रदान किया गया। प्रशिक्षण टीम में एम. सुरज, मोइज अहमद, सिद्धांत जैन एवं भूपेंद्र जगत शामिल रहे।
प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ मैदानी परिस्थितियों में एंटी-स्नेयर वॉक एवं टाइगर मॉनिटरिंग को किस प्रकार व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जाए, इस पर विशेष जोर दिया गया।
लगभग 100 वन अधिकारी एवं कर्मचारी हुए शामिल
एक दिवसीय कार्यशाला में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 100 वन अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी शामिल हुए। इनमें रेंज अधिकारी, डिप्टी रेंजर एवं बीट गार्ड प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
वन विभाग की ओर से मनोज बघेल, SDO कोर एरिया; अजय कावरे, SDO बफर एरिया तथा कुबेर चरण बारिहा, SDO भैरमगढ़ सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
सभी परिक्षेत्र अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल हुए।
संरक्षण एवं मॉनिटरिंग को मिलेगी नई मजबूती
यह कार्यशाला इंद्रावती टाइगर रिजर्व में एंटी-स्नेयर अभियान और बाघ मॉनिटरिंग को अधिक व्यवस्थित, वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रही। प्रशिक्षित मैदानी अमले के माध्यम से वन क्षेत्रों में नियमित निगरानी, अवैध फंदों की पहचान एवं समयबद्ध कार्रवाई तथा बाघों एवं अन्य वन्यजीवों से संबंधित फील्ड डेटा का बेहतर संकलन संभव होगा।
फंदा मुक्त इंद्रावती और सुरक्षित बाघ आवास की दिशा में यह प्रशिक्षण वन विभाग एवं संरक्षण संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल है।


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